Personal tools
 
You are here: Home Products Ganesh Chaturthi Ganesh 2010 गणेश चतुर्थी का प्राकृतिक महत्व
Document Actions

गणेश चतुर्थी का प्राकृतिक महत्व

श्री विवेक गोडबोले, संस्थापक, श्री कृष्ण यजुर्वेद पाठशाला, सतारा के साथ दिए गए साक्षात्कार के अंश

नीचे दिए हुआ साक्षात्कार, साल 2008 में, ईको-एक्सिस्ट की टीम के द्वारा लिया गया | इसका उद्देश्य, गणेश चतुर्थी और प्रकृति के बीच के सम्बन्ध को समझना है | श्री विवेक गोडबोले, श्री कृष्ण यजुर्वेद के तैत्रेय शाखा के वैदिक शिष्य हैं | वह सतारा के वैदिक पाठशाला, के संस्थापक हैं एवं स्वयं प्रकृति के प्रेमी भी हैं | गणेश चतुर्थी पर उनके विचारों ने, ईको-एक्जिस्ट को भी प्रभावित किया है |

प्र. क्या आप गणेश चतुर्थी की शुरुआत के बारें में बता सकते हैं ?


उ. गणेश चतुर्थी का सही मायने में आनंद उठाने के लिए, हमें यह जानने की आवश्यकता है की, इसकी शुरुआत कहाँ से हुई हैं | गण का अर्थ सामूहिक होता है और गणपति से अर्थ, ऐसा व्यक्ति जो सभी को साथ में लेकर आता है और उनकी अध्यक्षता करता है |

इसका सही मायने में अर्थ भक्ति है जो की, सभी के अन्दर एकता का भाव जगाता है | गणपति को ज्ञान का भी देवता कहा जाता है | गणेश चतुर्थी को मानसून से भी जोड़ के देखा जाता है |

भारतीय पांचांग के अनुसार, ज्येष्ठ महीने के अंत में, जब बारिश की शुरुआत होती है तो, त्योहारों की झड़ी सी लग जाती है | इन त्योहारों में, भाद्रपद के महीने के चौथे दिन गणेश चतुर्थी का त्यौहार मनाया जाता है |

पुराने समय में लोग नदियों में नहाया करते थे | उस समय बारिश के मौसम में नदियाँ बिलकुल साफ़ हुआ करती थी | नदियों के किनारे की मिट्टियों को लोग पवित्र मानते थे और उनकी पूजा किया करते थे | इन्ही मिट्टियों से लोग गणेश की मूर्तियाँ भी बनाया करते थे | यहीं से गणेश चतुर्थी की शुरुआत हुई |

प्र. पूजा करने का सही तरीका क्या है?


उ. जब गणपति को घर में लाया जाता है, तो पूरे घर में ख़ुशी सी छा जाती है और सबके मन में बस एक ही सवाल होता है की, गणपति का स्वागत सबसे अलग तरीके से कैसे किया जाये ? हम जो भी करने का तय करते है उसमें यह ध्यान रखते हैं की वो भक्ति, ख़ुशी, प्यार एवं सच्चाई के साथ किया जाये | हम गणेश को अपने घर का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित करते हैं | हम उन्हें अपने दिल में उतारते हैं | हम उनसे प्रार्थना करते हैं की वो हमारे ऊपर हमेश अपनी कृपा बनाये रखे, सबको खुशहाली दें और सबका भला करें |
प्र. पूजा के लिए प्रयोग में लायी जाने वाली सामग्रियों के बारे में आपके क्या विचार हैं ?
उ. गणेश पूजा के लिए प्रयोग में लायी जाने वाली हर एक सामग्री का अपना अलग ही महत्व है और ये सारी की सारी चीजे प्रकृति से जुड़ी हुई हैं | वास्तव में प्रयोग में आने वाली सामग्रियां, हमें सीधे तौर पर प्रकृति से प्राप्त होती हैं और जिसमें किसी भी प्रकार का रसायन नहीं होता हैं | हल्दी पाउडर और कुमकुम, हल्दी एवं चन्दन की लकड़ियों से मिलकर बने हैं और जिसका उपयोग हर पूजा में किया जाता है | ये सभी सामग्रियों का प्रयोग दवा के तौर पर भी किया जाता है |

हल्दी एक एंटीसेप्टिक है जबकि कुमकुम और चन्दन शीतल स्पर्श देता है | कुमकुम के लेप को माथे पर लगाने से ऐसा माना जाता है की सूर्य भगवान के दर्शन होते हैं | जब हम गणेशा की मूर्ती पर कुमकुम लगाते हैं तो हम भगवान सूर्य को अपने घर में बुलाते हैं | गणेशा की मूर्ती पर दूर्वा घास चढाने का भी अलग महत्व है, इससे स्मृति बढ़ती है | चुकी भगवान गणेश को ज्ञान का भी देवता कहा जाता है, इसलिए ये दूर्वा घास उनके द्वारा ही दिया गया है | इसके अलावा उन्हें मोदक के लड्डू भी चढ़ते हैं, जो उन्हें सबसे ज्यादा पसंद हैं |

प्र. गणेश पूजा करना जरुरी क्यों हैं ?


उ. सभी भक्त अपने अपने तरीकों से पूजा करते हैं | इस समारोह में हम जितना भी अपना प्रयास लगाते हंी वो भी एक तरह की पूजा हैं | पूजा, एक तरह का माध्यम है हमारे और उस सार्वभौमिक शक्ति से बात करने का | पूजा एक "दर्शन" है न की "प्रदर्शन" | ये भगवान को हमारे साथ देखने की एक दृष्टि है |

प्र. गणेश मूर्ती का आकार एवं रंग क्या होना चाहिए ?
उ. गणेश की मूर्तियों को बनाना भी एक प्रकार की पूजा हैं, ये कभी भी 10 या 15 फीट ऊँचा नहीं हो सकता | ये हमारे हथेली की नाप का होना चाहिए ताकि इसे हम कहीं भी आसानी से ले जा सकें | इसे प्राकृतिक रंगों से रंगा जाना चाहिए | इसे फूलों से सजाना चाहिए |

प्र. गणेश पूजा पिछले कुछ वर्षों से कैसे बदला एवं वो कौन से कारक है जो इसके बदलने के लिए जिम्मेदार हैं ?
उ. गणेश मूर्तियों को कुम्हार समुदाय द्वारा बनाया जाता है | ये मूर्तियाँ नदियों की मिट्टियों से बनायीं जाती हैं, जिन्हें बाद में प्रवाहित करके वहीँ डाल दिया जाता हैं | पहले के दिनों में ये त्यौहार सिर्फ 1 या 2 दिनों के लिए मनाया जाता था, पर धीरे - धीरे ये 2, 3 और 5 दिनों के लिए बढ़ता चला गया | फिर जब इस त्यौहार में माँ गौरी का आगमन हुआ तो ये 7 दिनों के लिए बढ़ा, फिर इसे अनन्त चतुर्दशी की वजह से 10 दिनों के लिए बढ़ाया गया | धीरे – धीरे घर की बनी हुई मूर्तियाँ बहुत ज्यादा प्रसिद्ध हो गयीं | प्राकृतिक रंगों की जगह प्लास्टर ऑफ़ पेरिस का प्रयोग होने लगा |

गणेश पूजा अब घरों से निकलकर सोसायटी और समुदायों में पहुच गयी है | पहले कुम्हार, गणेश की मूर्तियों को केवल श्रद्धा के लिए बनाते थे पर अब ये एक व्यवसाय हो गया है | व्यवसाय के साथ ही भक्तों ने भी मूर्तियों के भाव में मोल - तोल करना शुरू कर दिया | अब लोग पूजा भी कुछ मिलने की अपेक्षा रख कर करते हैं |

प्र. गणेश समारोह से उत्पन्न होने वाले पर्यावर्णीय मुद्दों का हल कैसे ढूंढा जा सकता है ?
उ. हमें अपने पर्यावरण के प्रति जागरूक होना चाहिए | भक्ति का ये मतलब नहीं है की, हमारे क्रियाकलापों से, हमारे पर्यावरण पर कोई गलत प्रभाव पड़ें | यदि हमने अपने घर में इतने अच्छे शुभ तरीकों से पूजा की है लेकिन हम अपने आस पास की नदियों के बारे में जागरूक नहीं हैं तो फिर हमने ज्ञान के देवता की कैसी पूजा की और हमने कौन सा ज्ञान प्राप्त किया ?

हमें प्राकृतिक तरीकों से बनायीं गयी मूर्तियों को बढ़ावा देना चाहिए | क्या आपको नहीं लगता की आपकी भक्ति इतनी गहरी हो की आपके प्रतिक्रियाओं के द्वारा किसी भी चीज को नुकसान न पहुचे, जैसे यदि आप गणपति को हर साल अपने घर नहीं लाते हैं तो वो आपसे नाराज नहीं होंगे | ऐसे विकल्पों को चुने जिससे सभी जगह सामंजस्य फैलें | हमें लाउड स्पीकर से अपनी पूजा को सभी को सुनाने की कोई जरुरत नहीं हैं | ऐसी क्रियाएं जो हमारे साथ - साथ औरों का भी नुकसान करें वो भक्ति नहीं हो सकती |
हम गणेशा को विसर्जित करने वाले जल का प्रयोग दुबारा कर सकते हैं ताकि गणेशा जहाँ से आये हैं वहीँ वापस चले जायें | इस जल का उपयोग हम बागवानी आदि के लिए कर सकते हैं |
सजावट में प्रयोग होने वाले थर्माकोल और प्लास्टिक पर रोक लगानी चाहिए | हमें इन सभी चीजों से ऊपर उठकर, अपने पर्यावरण को बचाने के लिए कुछ करना चाहिए |

प्र. गणेशा किस चीज के प्रतीक हैं?
उ. गणेशा का पूरा शरीर मानव का एवं सर हाथी का है | लोग अक्सर इस तरह के असामान्य मिश्रण को देख कर आश्चर्यचकित होते हैं | यह एक शाकाहारी पशु है जो बहुत बड़ा है | ये समुदायों में रहते हैं एवं मादा हाथी इन्हें मार्गदर्शित करती हैं | मानव और हाथी में कई सारी सामानताएं होती हैं | शोध ये बताते हैं की, ये अपने भावनाओं जैसे दुःख, ख़ुशी एवं वफादारी को व्यक्त करने में सक्षम हैं | यदि इनके झुण्ड में किसी की भी मृत्यु हो जाये तो ये उसके लिए दुःख भी व्यक्त करते हैं |

गणेशा हम सभी (मानवीय एवं पशु जाति) में एकता पैदा करने के प्रतीक हैं | ये शक्ति एवं बुद्धिमत्ता का भी प्रतीक हैं | गणेशा की उत्पत्ति के पीछे शिव और पार्वती की एक काल्पनिक कथा है | ये वैसे तो एक मिथक है फिर भी इसके गहरी सच्चाइयों को जानने के लिए इस कथा को जानना जरुरी है |

गणपति के 4 हाथ हैं | चुहाँ, इनकी सवारी है | लेकिन चुहाँ ही क्यों ? चूहे के अन्दर चीजो को छोटे - छोटे भाग में करने की काबलियत है | इससे प्रेरित होकर, हमें अपने दिमाग का विकास इस कदर करना चाहिए की, हम हर चीज को विस्तृत तरीके एवं गहराई से समझ सकें |

गणेश अपने कमर में सांप भी लपेटे रहते हैं, जो की उर्जा का प्रतीक है | इस उर्जा को, आप रचनात्मक एवं विध्वंसात्मक कार्यों में लगा सकते हैं | सांप गणेश की नाभि के पास रहता है जो की शरीर में उपस्थित वायु का प्रतीक है |

भगवान् गणेश की पूजा के लिए कईं सारी प्रार्थनाएं हैं, उनमें से किसी एक को याद करके, उसे अपनी आवाज में गाने से आपके दुखों में कमी आएगी |

गणपति प्राकृतिक चक्रों से जुड़े हुएं हैं | जब हम मिटटी से बनी हुई इस मूर्ति को अपने घर में लाते हैं तो, हम उसे अपना पूरा ध्यान एवं स्नेह देने का भी वादा करते हैं जिससे हम सभी एक होकर उनकी सेवा करते हैं |

हम गणेशा से प्रार्थना करते हैं की, हमें बुद्धि एवं ख़ुशी दें | गणपति का त्यौहार एक दुसरे से प्रतिस्पर्धा करने का त्यौहार नहीं है बल्कि आपस में प्रेम, सौहार्द एवं एकता को बनाये रखने का त्यौहार है |

 
 
 
Designed and managed
under EkDuniya initiative of
OneWorld
 
 

Powered by Plone CMS, the Open Source Content Management System

This site conforms to the following standards: